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Breaking News : जयपुर में कांग्रेसी नेताओं की टिकट लेकर हुई बैठक

Agro Rajasthan : राजस्थान विधानसभा चुनाव पर सबकी नजरें टिकी हैं. देश में यू तो इस वर्ष 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले है लेकिन राजस्थान में कांग्रेस की सरकार की कमान सीएम अशोक गहलोत के हाथों में हैं और इस बार का चुनाव गहलोत के राजनैतिक कैरियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, यहीं कारण है इन चुनावों में साम, दाम, दण्ड, भेद के कोई तीर तरकश में नहीं रह पायेंगे

राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार बुधवार को थम गया। मतदान 7 दिसंबर को होगा। इस बार भी बसपा सहित छोटी पार्टियों और निर्दलियों ने मुकाबला रोचक बना दिया है। इनमें दोनों ही दलों के कई बागी भी हैं। बिना किसी लहर और मुद्दे वाले इस चुनाव में पांच दर्जन सीटों पर त्रिकोणीय व दर्जन भर सीटों पर चतुष्कोणीय मुकाबले ने किसी भी एक पार्टी को बहुमत मिलने को लेकर संशय खड़ा कर दिया है। हमेशा की तरह दो मुख्य पार्टियों- भाजपा और कांग्रेस के बीच दंगल 170-180 सीटों पर ही रहने की उम्मीद है। पिछले पांच चुनावों को देखें, तो भाजपा और कांग्रेस से छोटी पार्टियों व निर्दलियों ने 14 से लेकर 28 सीटें तक छीनी हैं।

जब निर्दलीय विधायक बने सरकार की संजीवनी


प्रदेश में 200 विधानसभा सीटें हैं, लेकिन अलवर की रामगढ़ सीट पर बसपा प्रत्याशी लक्ष्मण चौधरी के निधन के बाद चुनाव स्थगित होने से अब 199 सीटों पर वोटिंग होगी। इनमें से दोनों प्रमुख पार्टियों के बागियों ने 30-30 सीटों पर समीकरण बिगाड़ रखे हैं। वर्ष 2008 में कांग्रेस जब 96 सीटों पर अटक गई थी और सरकार बनाने के लिए 100 का आंकड़ा पार करना था, तो मंत्री पद का प्रस्ताव देकर बसपा के सभी 6 विधायकों को कांग्रेस में शामिल किया गया था। इसी तरह का वाकया वर्ष 1993 में हुआ था, जब भाजपा 96 सीटें ही जीत पाई थी, तो चार निर्दलियों को मंत्री पद आदि का राजनीतिक लाभ देकर भाजपा ने सरकार बनाई थी और भैरोंसिंह शेखावात मुख्यमंत्री बने थे।

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Alpesh Khokhar

Alpesh Khokhar

🚀 Founder of JaneRajasthan 🌟 Passionate about Culture & Rural Development 🌾 Bringing you the latest updates in the world of Rajasthan 🌿 Committed to sustainable growth and community empowerment 📍 Based in the heart of Rajasthan, India 🇮🇳

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